Transliteration: (Li ya'kuloo min samarihee wa maa 'amilat-hu aideehim; afalaa yashkuroon)
"ताकि वे उसके फल खाएं, हालाँकि उनके हाथों ने इसे नहीं बनाया [49]; तो क्या वे शुक्र अदा नहीं करते [50]?"
इंसान सिर्फ़ बीज बोता है और पानी देता है, मगर दरख़्त में जान डालना, फल में मिठास, रंग और ख़ुशबू पैदा करना किसी इंसान के बस में नहीं। यह सब अल्लाह तआला की क़ुदरत का करिश्मा है।
इतनी बे-मिसाल नेमतें मुफ़्त पाकर भी जो इंसान अल्लाह की वहदानियत और उसके रसूल की रिसालत का शुक्र अदा न करे, वह बद-तरीन ना-शुक्रा है।
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