कुरान - 36:37 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
وَءَايَةٞ لَّهُمُ ٱلَّيۡلُ نَسۡلَخُ مِنۡهُ ٱلنَّهَارَ فَإِذَا هُم مُّظۡلِمُونَ

Transliteration: (Wa Aayatul lahumul lailu naslakhu minhun nahaara fa-izaa hum muzlimoon)

और उनके लिए एक निशानी रात है जिससे हम दिन को खींच लेते हैं [54], तो अचानक वे अंधेरे में रह जाते हैं; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 37

"और उनके लिए एक निशानी रात है जिससे हम दिन को खींच लेते हैं [54], तो अचानक वे अंधेरे में रह जाते हैं;"

[54] रात व दिन की गर्दिश और नूरे नबुव्वत

अस्ल फ़ज़ा तारीक है, सूरज की रौशनी से अल्लाह दिन की चादर ओढ़ाता है। जब सूरज ग़ुरूब होता है तो दिन खिंच जाता है और अंधेरा छा जाता है। रूहानी ऐतबार से इंसानी दिल भी जिहालत के अंधेरे में था, जिसे हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ के नूरे मुजस्सम ने ईमान से मुनव्वर फ़रमाया।

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