कुरान - 36:38 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
وَٱلشَّمۡسُ تَجۡرِي لِمُسۡتَقَرّٖ لَّهَاۚ ذَٰلِكَ تَقۡدِيرُ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡعَلِيمِ

Transliteration: (Wash-shamsu tajree limustaqarril lahaa; zaalika taqdeerul 'Azeezil Aleem)

और सूरज [55] अपने मुक़र्रर रास्ते पर चला जा रहा है [56]; यह ज़बरदस्त (ग़ालिब), सब कुछ जानने वाले का तय किया हुआ अंदाज़ा है [57]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 38

"और सूरज [55] अपने मुक़र्रर रास्ते पर चला जा रहा है [56]; यह ज़बरदस्त, सब कुछ जानने वाले का तय किया हुआ अंदाज़ा है [57]!"

[55] सूरज की गर्दिश

यह आयत वाज़ेह फ़रमाती है कि सूरज साकिन नहीं है बल्कि अल्लाह के मुक़र्रर किए हुए दायरे में मुसलसल गर्दिश कर रहा है।

[56] मुस्तक़र — क़यामत की मियाद

सूरज की यह गर्दिश उसके 'मुस्तक़र' यानी क़यामत के दिन तक जारी रहेगी, जब यह निज़ाम लपेट दिया जाएगा। हदीस शरीफ़ में है कि सूरज हर रोज़ अर्श के नीचे सज्दा करता है और तुलूअ होने की इजाज़त तलब करता है।

[57] अज़ीज़ व अलीम का मुक़र्रर निज़ाम

यह सारा अज़ीम फ़लकी निज़ाम उस अल्लाह की हिकमत और इल्म से क़ायम है जो सब पर ग़ालिब है।

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