कुरान - 36:40 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
لَا ٱلشَّمۡسُ يَنۢبَغِي لَهَآ أَن تُدۡرِكَ ٱلۡقَمَرَ وَلَا ٱلَّيۡلُ سَابِقُ ٱلنَّهَارِۚ وَكُلّٞ فِي فَلَكٖ يَسۡبَحُونَ

Transliteration: (Lash shamsu yambaghee lahaaa an tudrikal qamara walal lailu saabiqun nahaar; wa kullun fee falaki yasbahoon)

न सूरज के बस में है कि वह चाँद को पकड़े [60], और न रात दिन से आगे बढ़ सकती है [61]; और सब के सब एक-एक फ़लक (मदार) में तैर रहे हैं [62]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 40

"न सूरज के बस में है कि वह चाँद को पकड़े [60], और न रात दिन से आगे बढ़ सकती है [61]; और सब के सब एक-एक फ़लक में तैर रहे हैं [62]!"

[60] शम्स व क़मर का अलग-अलग दायरा-ए-कार

सूरज दिन में और चाँद रात में अपनी ख़िदमत अंजाम देता है। चाँद अपना चक्कर एक माह में और सूरज एक साल में पूरा करता है। दोनों की रफ़्तार और काम में रब्बे क़ादिर ने मुकम्मल तवाज़ुन रखा है।

[61] रात और दिन का मुक़र्रर वक़्त

रात अपने मुक़र्रर वक़्त से पहले दिन पर ग़ालिब नहीं आ सकती। हाँ, क़यामत के क़रीब यह निज़ाम दरहम-बरहम होगा और सूरज व चाँद एक कर दिए जाएंगे (सूरह क़ियामह)।

[62] 'फ़लकिं यस्बहून' — सैयारात का तैरना

सूरज, चाँद और सितारे अपने-अपने मदार में ऐसे तैर रहे हैं जैसे पानी में मछलियां तैरती हैं। यह कायनात का बे-मिसाल हुस्न अल्लाह की शान का आईनादार है।

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