कुरान - 36:39 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
وَٱلۡقَمَرَ قَدَّرۡنَٰهُ مَنَازِلَ حَتَّىٰ عَادَ كَٱلۡعُرۡجُونِ ٱلۡقَدِيمِ

Transliteration: (Walqamara qaddarnaahu manaazila hattaa 'aada kal'ur joonil qadeem)

और चाँद के लिए हमने मंज़िलें मुक़र्रर कर दी हैं [58], यहाँ तक कि वह (घटते-घटते) खजूर की पुरानी सूखी टहनी की तरह हो जाता है [59]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 39

"और चाँद के लिए हमने मंज़िलें मुक़र्रर कर दी हैं [58], यहाँ तक कि वह खजूर की पुरानी सूखी टहनी की तरह हो जाता है [59]!"

[58] चाँद की 28 मंज़िलें और इस्लामी कैलेंडर

अल्लाह ने चाँद के लिए 28 मंज़िलें मुक़र्रर फ़रमाई हैं जिससे इस्लामी महीनों, रोज़ों, हज और इबादतों के औक़ात तय होते हैं।

[59] 'उर्जूनिल क़दीम' — इंसानी उम्र की मिसाल

महीने के आख़िर में चाँद खजूर की पुरानी, ज़र्द और मुड़ी हुई टहनी जैसा बारीक हो जाता है। यह इंसानी ज़िंदगी की भी मिसाल है कि इंसान बचपन से जवान होकर चौदहवीं के चाँद जैसा मुकम्मल होता है, और फिर बुढ़ापे में कमज़ोर और लाचार होकर झुक जाता है।

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