कुरान - 36:41 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
وَءَايَةٞ لَّهُمۡ أَنَّا حَمَلۡنَا ذُرِّيَّتَهُمۡ فِي ٱلۡفُلۡكِ ٱلۡمَشۡحُونِ

Transliteration: (Wa Aayatul lahum annaa hamalnaa zurriyatahum fil fulkil mashhoon)

और उनके लिए एक निशानी यह भी है कि हमने उनकी नस्ल (औलाद) को भरी हुई कश्ती में सवार किया [63]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 41

"और उनके लिए एक निशानी यह भी है कि हमने उनकी नस्ल को भरी हुई कश्ती में सवार किया [63]।"

[63] सफ़ीन-ए-नूह (अलैहिस्सलाम) — रहमत और कु़दरत की निशानी

इस आयते करीमा में हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती की तरफ़ इशारा है, जो तूफ़ान-ए-नूह के दौरान इंसानों और जानवरों से भरी हुई थी।

लफ़्ज़ "उनकी नस्ल (औलाद)" से मुराद यह है कि बचाए गए लोगों की औलादें — यानी मौजूदा नस्लें — उस वक़्त अपने आबा-ओ-अजदाद की पुश्तों में मौजूद थीं जो कश्ती में सवार हुए थे।

यह वाक़िआ अल्लाह तआला की अज़ीम क़ुदरत, असीम रहमत और जिसे चाहे नजात देने की शान का दायमी और इबरतनाक निशान है।

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