Transliteration: (Wa Aayatul lahum annaa hamalnaa zurriyatahum fil fulkil mashhoon)
"और उनके लिए एक निशानी यह भी है कि हमने उनकी नस्ल को भरी हुई कश्ती में सवार किया [63]।"
इस आयते करीमा में हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती की तरफ़ इशारा है, जो तूफ़ान-ए-नूह के दौरान इंसानों और जानवरों से भरी हुई थी।
लफ़्ज़ "उनकी नस्ल (औलाद)" से मुराद यह है कि बचाए गए लोगों की औलादें — यानी मौजूदा नस्लें — उस वक़्त अपने आबा-ओ-अजदाद की पुश्तों में मौजूद थीं जो कश्ती में सवार हुए थे।
यह वाक़िआ अल्लाह तआला की अज़ीम क़ुदरत, असीम रहमत और जिसे चाहे नजात देने की शान का दायमी और इबरतनाक निशान है।
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