Transliteration: (Wa khalaqnaa lahum mim-mislihee maa yarkaboon)
"और हमने उनके लिए उसी जैसी और चीज़ें पैदा फ़रमाईं जिन पर वे सवार होते हैं [64]।"
इस आयत से मुराद वे कश्तियां और जहाज़ हैं जो हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) की कश्ती के बाद बनाए गए। उस वक़्त से लेकर क़ियामत तक अल्लाह तआला ने इंसानों को इल्म, हिकमत और महारत देकर इस सवारी की नेमत का तसल्सुल जारी रखा।
सफ़ीन-ए-नूह तमाम बहरी जहाज़ों की असल (बुनियाद) है, और हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) को कश्तीसाज़ी का पहला मौजिद (ईजाद करने वाला) माना जाता है, जैसा कि क़ुरआन के बारहवें पारे में ज़िक्र है।
लिहाज़ा इसके बाद बनने वाला हर जहाज़ उसी मोजिज़ाती बुनियाद का हिस्सा और अल्लाह की रहमत का खुला सबूत है।
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