कुरान - 36:44 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
إِلَّا رَحۡمَةٗ مِّنَّا وَمَتَٰعًا إِلَىٰ حِينٖ

Transliteration: (Illaa rahmatam minnaa wa mataa'an ilaa heen)

मगर हमारी तरफ़ से रहमत के तौर पर और एक ख़ास वक़्त तक के फ़ायदे के लिए [66]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 44

"मगर हमारी तरफ़ से रहमत के तौर पर और एक ख़ास वक़्त तक के फ़ायदे के लिए [66]।"

[66] सिर्फ़ रहमते इलाही ही हिफ़ाज़त का ज़रिया है

समुंदर के तूफ़ानों और तूफ़ानी मौजों के दरमियान इंसानों का सलामत किनारे पहुंचना महज़ अल्लाह की रहमत और करम है।

अल्लाह तआला उन्हें मौत के मुक़र्ररा वक़्त तक दुनिया की नेमतों से फ़ायदा उठाने की मोहलत देता है ताकि वे शुक्रगुज़ारी इख़्तियार करें और ईमान लाएं।

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