Transliteration: (Wa maa ta'teehim min aayatim min Aayaati Rabbihim illaa kaanoo 'anhaa mu'rideen)
"और उनके पास उनके रब की निशानियों में से कोई निशानी ऐसी नहीं आती [68] जिससे वे मुंह न फेरते हों [69]!"
निशानियों से मुराद क़ुरआने मजीद की आयात, हुज़ूर अकरम ﷺ के मोजिज़ाती दलाइल और कायनात के मुशाहदात हैं जो अल्लाह की वहदानियत और कु़दरत की गवाही देते हैं।
मुशरिक़ीन ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने के बजाय जान-बूझकर मुंह मोड़ते हैं। अल्लाह की निशानियों में तदब्बुर करना इबादत है, जबकि उनसे मुँह मोड़ना तकब्बुर और सरकशी है।
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