कुरान - 36:46 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
وَمَا تَأۡتِيهِم مِّنۡ ءَايَةٖ مِّنۡ ءَايَٰتِ رَبِّهِمۡ إِلَّا كَانُواْ عَنۡهَا مُعۡرِضِينَ

Transliteration: (Wa maa ta'teehim min aayatim min Aayaati Rabbihim illaa kaanoo 'anhaa mu'rideen)

और उनके पास उनके रब की निशानियों में से कोई निशानी ऐसी नहीं आती [68] जिससे वे मुंह न फेरते हों [69]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 46

"और उनके पास उनके रब की निशानियों में से कोई निशानी ऐसी नहीं आती [68] जिससे वे मुंह न फेरते हों [69]!"

[68] कु़दरते इलाही की निशानियां

निशानियों से मुराद क़ुरआने मजीद की आयात, हुज़ूर अकरम ﷺ के मोजिज़ाती दलाइल और कायनात के मुशाहदात हैं जो अल्लाह की वहदानियत और कु़दरत की गवाही देते हैं।

[69] हक़ से जान-बूझकर मुँह फेरना

मुशरिक़ीन ग़ौर-ओ-फ़िक्र करने के बजाय जान-बूझकर मुंह मोड़ते हैं। अल्लाह की निशानियों में तदब्बुर करना इबादत है, जबकि उनसे मुँह मोड़ना तकब्बुर और सरकशी है।

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