"और जब उनसे कहा जाता है: 'उस (अज़ाब) से डरो जो तुम्हारे सामने है और जो तुम्हारे पीछे है [67] ताकि तुम पर रहम किया जाए';"
"जो तुम्हारे सामने है" से मुराद दुनिया के अज़ाब, मौत की सख़्तियां और पहली क़ौमों की हलाकत है, और "जो तुम्हारे पीछे है" से मुराद क़ब्र और आख़िरत की होलनाकियां हैं।
या इसका मतलब यह है कि उन गुनाहों से बचो जो तुम कर चुके हो और उन गुनाहों से भी बचो जो आइंदा सामने आ सकते हैं। तक़्वा ही रहमते इलाही के नुज़ूल का ज़रिया है।
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