कुरान - 36:54 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

54
فَٱلۡيَوۡمَ لَا تُظۡلَمُ نَفۡسٞ شَيۡـٔٗا وَلَا تُجۡزَوۡنَ إِلَّا مَا كُنتُمۡ تَعۡمَلُونَ

Transliteration: (Fal-Yawma laa tuzlamu nafsun shai'anw-wa laa tujzawna illaa maa kuntum ta'maloon)

पस आज के दिन किसी जान पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं किया जाएगा, और तुम्हें बदला नहीं दिया जाएगा मगर उसी का जो तुम करते थे [85]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 54 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 54

"पस आज के दिन किसी जान पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं किया जाएगा, और तुम्हें बदला नहीं दिया जाएगा मगर उसी का जो तुम करते थे [85]।"

[85] अदल और फ़ज़्ल का निज़ाम

अल्लाह की अदालत में मुकम्मल इंसाफ़ होगा:

  1. काफ़िरों और गुनाहगारों को उनके आमाल के बराबर अज़ाब होगा, ज़रा भी ज़्यादती नहीं की जाएगी।
  2. मोमिनों को उनके नेक आमाल का बदला तो मिलेगा ही, साथ ही अल्लाह अपने फ़ज़्ल और रहमत से मज़ीद बे-हिसाब नेमतें अता फ़रमाएगा, जैसा कि सूरह क़ाफ़ (आयत 35) में है: "और हमारे पास उससे भी ज़ियादा है।"

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