कुरान - 36:52 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
قَالُواْ يَٰوَيۡلَنَا مَنۢ بَعَثَنَا مِن مَّرۡقَدِنَاۜۗ هَٰذَا مَا وَعَدَ ٱلرَّحۡمَٰنُ وَصَدَقَ ٱلۡمُرۡسَلُونَ

Transliteration: (Qaaloo yaa wailanaa mam ba'asanaa mim marqadinaa; haaza maa wa'adar Rahmanu wa sadaqal mursaloon)

वे कहेंगे: "हाय हमारी ख़राबी [80]! किसने हमें हमारी ख़्वाबगाह (सोने की जगह) से जगा दिया [81]? यह वही है जिसका रहमान ने वादा फ़रमाया था [82], और रसूलों ने सच ही फ़रमाया था [83]!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 52

"वे कहेंगे: 'हाय हमारी ख़राबी [80]! किसने हमें हमारी ख़्वाबगाह से जगा दिया [81]? यह वही है जिसका रहमान ने वादा फ़रमाया था [82], और रसूलों ने सच ही फ़रमाया था [83]!'"

[80] काफ़िरों की हसरत और वावैला

क़ब्रों से उठते ही जब काफ़िर महशर की भयानक तपिश और अज़ाब के फ़रिश्तों को देखेंगे, तो वे अफ़सोस और हसरत से चीख़ उठेंगे।

[81] क़ब्र की हालत और दो सूरों का वक़फ़ा

काफ़िरों को बरज़ख़ में अज़ाब तो होता था, लेकिन दोनों सूरों के दरमियान चालीस साल के अरसे में उनका अज़ाब मौक़ूफ़ कर दिया गया था और वे सोए हुए थे। महशर का अज़ाब देखकर उन्हें क़ब्र का अज़ाब नींद जैसा महसूस होगा।

[82] वादा-ए-रहमान की तस्दीक़

उन्हें या तो मोमिन जवाब देंगे या वे ख़ुद बे-साख़्ता कह उठेंगे कि यह वही दिन है जिसका रहमान ने अपनी किताबों में वादा फ़रमाया था।

[83] अंबिया-ए-किराम की सदाक़त का ऐतराफ़

उस दिन काफ़िर मजबूरन ऐतराफ़ करेंगे कि अल्लाह के सच्चे रसूलों ने जो कुछ फ़रमाया था, वह ऐन हक़ और सच था।

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