कुरान - 36:50 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
فَلَا يَسۡتَطِيعُونَ تَوۡصِيَةٗ وَلَآ إِلَىٰٓ أَهۡلِهِمۡ يَرۡجِعُونَ

Transliteration: (Falaa yastatee'oona taw siyatanw-wa laaa ilaaa ahlihim yarji'oon)

फिर न तो वे कोई वसीयत करने पर क़ादिर होंगे [76], और न ही अपने घर वालों की तरफ़ लौट सकेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 50

"फिर न तो वे कोई वसीयत करने पर क़ादिर होंगे [76], और न ही अपने घर वालों की तरफ़ लौट सकेंगे।"

[76] क़ियामत की नागाह आमद और आजिज़ बे-बसी

मौत और क़ियामत का यह हमला इतना नागाह होगा कि इंसान को न वसीयत लिखने की मोहलत मिलेगी, न अपने माल का फ़ैसला करने की, और न ही बाज़ार या काम की जगह से अपने बीवी-बच्चों के पास वापस जाने का वक़्त मिलेगा। जहां जो होगा, वहीं ढेर हो जाएगा।

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