कुरान - 36:51 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
وَنُفِخَ فِي ٱلصُّورِ فَإِذَا هُم مِّنَ ٱلۡأَجۡدَاثِ إِلَىٰ رَبِّهِمۡ يَنسِلُونَ

Transliteration: (Wa nufikha fis-soori faizaa hum minal ajdaasi ilaa Rabbihim yansiloon)

और सूर फूँका जाएगा [77], तो उसी वक़्त वे अपनी क़ब्रों से [78] अपने रब की तरफ़ तेज़ी से दौड़ते हुए निकल पड़ेंगे [79]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 51

"और सूर फूँका जाएगा [77], तो उसी वक़्त वे अपनी क़ब्रों से [78] अपने रब की तरफ़ तेज़ी से दौड़ते हुए निकल पड़ेंगे [79]!"

[77] दूसरा सूर (नफ़ख़ा-ए-सानिया)

यह हज़रत इसराफ़ील (अलैहिस्सलाम) का दूसरा सूर होगा जिसके फूँकते ही तमाम इंसान दोबारा ज़िंदा हो जाएंगे। पहले और दूसरे सूर के दरमियान चालीस साल का फ़ासला होगा।

[78] क़ब्रों से ज़िंदा होकर निकलना

ज़मीन फट जाएगी और सदियों पहले ख़ाक में मिल जाने वाले जिस्म अपने सरों से मिट्टी झाड़ते हुए क़ब्रों से बाहर निकल आएंगे।

[79] मैदाने महशर की तरफ़ बे-क़रार दौड़ना

सब लोग अल्लाह तआला के हुक्म पर मैदाने महशर और बारगाहे अदालत की तरफ़ तेज़ी से दौड़े चले जाएंगे।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now