कुरान - 36:49 सूरह या-सीन अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
مَا يَنظُرُونَ إِلَّا صَيۡحَةٗ وَٰحِدَةٗ تَأۡخُذُهُمۡ وَهُمۡ يَخِصِّمُونَ

Transliteration: (Maa yanzuroona illaa saihatanw waahidatan ta'khuzuhum wa hum yakhissimoon)

वे किसी चीज़ का इंतिज़ार नहीं कर रहे मगर सिर्फ़ एक भयानक चीख़ (सयहा) का [74], जो उन्हें उस वक़्त आ पकड़ेगी जब वे (दुनियावी झगड़ों में) बहस-मुबाहिसा कर रहे होंगे [75]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह या-सीन आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह या-सीन तफ़सीर - आयत 49

"वे किसी चीज़ का इंतिज़ार नहीं कर रहे मगर सिर्फ़ एक भयानक चीख़ का [74], जो उन्हें उस वक़्त आ पकड़ेगी जब वे बहस-मुबाहिसा कर रहे होंगे [75]!"

[74] सूर का पहला फूँकना (नफ़ख़ा-ए-ऊला)

इससे मुराद हज़रत इसराफ़ील (अलैहिस्सलाम) का पहला सूर है, जिसकी हौलनाक और भयानक आवाज़ से ज़मीन-ओ-आसमान की हर जानदार मख़्लूक़ तड़प कर फ़ना हो जाएगी। यह धमाका इतना अचानक होगा कि तौबा की मोहलत भी न मिलेगी।

[75] दुनियावी झमेलों में अचानक पकड़

लोग अपने रोज़मर्रा के कामों — ख़रीद-ओ-फ़रोख़्त, कारोबार, खाने-पीने और झगड़ों — में मसरूफ़ होंगे कि यकायक क़ियामत का यह सूर फूँक दिया जाएगा और सब कुछ ख़त्म हो जाएगा।

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