Transliteration: (Maa yanzuroona illaa saihatanw waahidatan ta'khuzuhum wa hum yakhissimoon)
"वे किसी चीज़ का इंतिज़ार नहीं कर रहे मगर सिर्फ़ एक भयानक चीख़ का [74], जो उन्हें उस वक़्त आ पकड़ेगी जब वे बहस-मुबाहिसा कर रहे होंगे [75]!"
इससे मुराद हज़रत इसराफ़ील (अलैहिस्सलाम) का पहला सूर है, जिसकी हौलनाक और भयानक आवाज़ से ज़मीन-ओ-आसमान की हर जानदार मख़्लूक़ तड़प कर फ़ना हो जाएगी। यह धमाका इतना अचानक होगा कि तौबा की मोहलत भी न मिलेगी।
लोग अपने रोज़मर्रा के कामों — ख़रीद-ओ-फ़रोख़्त, कारोबार, खाने-पीने और झगड़ों — में मसरूफ़ होंगे कि यकायक क़ियामत का यह सूर फूँक दिया जाएगा और सब कुछ ख़त्म हो जाएगा।
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