कुरान - 10:10 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
دَعۡوَىٰهُمۡ فِيهَا سُبۡحَٰنَكَ ٱللَّهُمَّ وَتَحِيَّتُهُمۡ فِيهَا سَلَٰمٞۚ وَءَاخِرُ دَعۡوَىٰهُمۡ أَنِ ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Da'waahum feehaa Subhaanakal laahumma wa tahiyyatuhum feehaa salaam; wa aakhiru da'waahum anil hamdu lillaahi Rabbil 'aalameen)

वहाँ (जन्नत में) उनकी दुआ यह होगी, "सुब्हानकल्लाहुम्मा" (ऐ अल्लाह! तू हर कमी से पाक है), और वहाँ उनका अभिवादन (सलाम) "सलाम" होगा, और उनकी पुकार का अंत यह होगा, "अल-हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन" (सब प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है, जो सारे जहानों का पालनहार है)। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 10 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] जन्नत वालों की तस्बीह और दुआ

जन्नत में इंसानों पर कोई इबादत या नमाज़ फ़र्ज़ नहीं होगी, लेकिन अल्लाह की नेमतों को देखकर उनकी ज़ुबान से स्वाभाविक रूप से अल्लाह की पाकीज़गी और बड़ाई ('सुब्हानकल्लाहुम्मा') निकलेगी, ठीक उसी तरह जैसे दुनिया में सांस ली जाती है।

✅ [2] जन्नत का अभिवादन "सलाम"

फ़रिश्ते और जन्नती आपस में एक-दूसरे को सलामती और शांति की दुआ देंगे, और स्वयं अल्लाह तआला की तरफ़ से उन्हें 'सलाम' कहा जाएगा।

✅ [3] "अल-हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन" पर समापन

हर नेमत, भोजन और खुशी के अंत में जन्नती अल्लाह का शुक्र अदा करेंगे। यह आयत सिखाती है कि मोमिन को दुनिया में भी हर काम और दुआ का अंत अल्लाह की हम्द व सना के साथ करना चाहिए।

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