कुरान - 10:11 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
۞وَلَوۡ يُعَجِّلُ ٱللَّهُ لِلنَّاسِ ٱلشَّرَّ ٱسۡتِعۡجَالَهُم بِٱلۡخَيۡرِ لَقُضِيَ إِلَيۡهِمۡ أَجَلُهُمۡۖ فَنَذَرُ ٱلَّذِينَ لَا يَرۡجُونَ لِقَآءَنَا فِي طُغۡيَٰنِهِمۡ يَعۡمَهُونَ

Transliteration: (Wa law yu'ajjilul laahu linnaasish sharra sti' jaalahum bil khairi laqudiya ilaihim 'ajaluhum fa nazarul lazeena laa yarjoona liqaaa'anaa fee tughyaanihim ya'mahoon)

और अगर अल्लाह लोगों के लिए बुराई (अज़ाब) को उसी तरह जल्दी भेज देता जिस तरह वे भलाई के लिए जल्दी मचाते हैं, तो उनका समय (मुहलत) कभी का समाप्त हो चुका होता। अतः हम उन लोगों को जो हमसे मिलने की उम्मीद नहीं रखते, उनकी सरकशी में भटकते हुए छोड़ देते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 11 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] सज़ा में जल्दबाज़ी न करने में अल्लाह की रहमत

इंसान कभी-कभी गुस्से या बेसब्री में अपने, अपनी औलाद या माल के ख़िलाफ़ बददुआ कर बैठता है या मुशरिक अज़ाब की मांग करते हैं। यदि अल्लाह उनकी बददुआओं और अज़ाब की मांग को तुरंत स्वीकार कर लेता, तो दुनिया का विनाश हो जाता। लेकिन अल्लाह हलीम और मेहरबान है, वह मुहलत देता है ताकि लोग सुधर सकें।

✅ [2] सरकशी और भटकाव की सज़ा

जो लोग आख़िरत और अल्लाह की पेशी पर यक़ीन नहीं रखते और जानबूझकर हक़ का इन्कार करते हैं, अल्लाह उन्हें उनकी ही मनमानी और ग़फ़लत में छोड़ देता है जिससे उनका गुनाह और अज़ाब बढ़ता जाता है।

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