Transliteration: (Wa izaa massal insaanad durru da'aanaa li jambiheee aw qaa'idan aw qaaa'iman falammaa kashafnaa 'anhu durrahoo marra ka an lam yad'unaaa ilaa durrin massah; kazaalika zuyyina lilmusrifeena maa kaanoo ya'maloon)
यह इंसान के कमज़ोर और अहसानफ़रामोश स्वभाव का सटीक मनोवैज्ञानिक चित्रण है। बीमारी, ग़रीबी या आफ़त के समय वह हर हाल में (करवट पर लेटे, बैठे या खड़े) अल्लाह से रो-रो कर दुआएं मांगता है, लेकिन जैसे ही संकट टलता है, वह अल्लाह को और अपनी दुआओं को ऐसे भुला देता है जैसे कभी कोई तकलीफ़ आई ही न थी।
नेक बंदे की पहचान यह है कि वह सुख और दुख दोनों में अल्लाह का शुक्रगुज़ार और आज्ञाकारी बना रहता है। इसके विपरीत, हद से गुज़रने वालों को शैतान उनके ग़लत आमाल को भी अच्छा करके दिखाता है।
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