कुरान - 10:13 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
وَلَقَدۡ أَهۡلَكۡنَا ٱلۡقُرُونَ مِن قَبۡلِكُمۡ لَمَّا ظَلَمُواْ وَجَآءَتۡهُمۡ رُسُلُهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ وَمَا كَانُواْ لِيُؤۡمِنُواْۚ كَذَٰلِكَ نَجۡزِي ٱلۡقَوۡمَ ٱلۡمُجۡرِمِينَ

Transliteration: (Wa laqad ahlaknal quroona min qablikum lammaa zalamoo wa jaaa'at hum Rusuluhum bil baiyinaati wa maa kaanoo liyu'minoo; kazaalika najzil qawmal mujrimeen)

और निस्संदेह, हमने तुमसे पहली कई क़ौमों को हलाक (नष्ट) कर दिया जब उन्होंने ज़ुल्म किया, हालांकि उनके रसूल उनके पास स्पष्ट निशानियां लेकर आए थे, लेकिन वे ईमान लाने वाले न थे। इसी तरह हम अपराधी लोगों को बदला दिया करते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 13 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] पिछली क़ौमों के विनाश से ऐतिहासिक सबक़

क़ौम-ए-आद, समूद, नूह और फ़िरऔन के उदाहरण देकर मक्का के मुशरिकीन और तमाम इंसानों को चेतावनी दी जा रही है कि अल्लाह की दी हुई ताक़त और दौलत पर घमंड न करो। जब रसूलों की हिदायत और मोजिज़ों के बावजूद किसी क़ौम ने ज़ुल्म और कुफ़्र को अपना रास्ता बना लिया, तो अल्लाह का अज़ाब उन पर आ पड़ा।

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