कुरान - 10:16 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
قُل لَّوۡ شَآءَ ٱللَّهُ مَا تَلَوۡتُهُۥ عَلَيۡكُمۡ وَلَآ أَدۡرَىٰكُم بِهِۦۖ فَقَدۡ لَبِثۡتُ فِيكُمۡ عُمُرٗا مِّن قَبۡلِهِۦٓۚ أَفَلَا تَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Qul law shaaa'al laahu maa talawtuhoo 'alaikum wa laaa adraakum bihee faqad labistu feekum 'umuran min qablih; afalaa ta'qiloon)

कह दीजिए, "यदि अल्लाह चाहता, तो न मैं तुम्हें यह पढ़कर सुनाता और न वह तुम्हें इससे अवगत कराता। मैं तो इससे पहले तुम्हारे बीच अपनी उम्र का एक लंबा हिस्सा (चालीस साल) गुज़ार चुका हूँ। तो क्या तुम बुद्धि से काम नहीं लेते?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 16 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] नुबुव्वत का अकाट्य ऐतिहासिक प्रमाण: रसूल ﷺ का पाक जीवन

वह्य आने से पहले नबी करीम ﷺ ने चालीस वर्ष मक्का वालों के बीच गुज़ारे थे। पूरा मक्का आपको 'अमीन' (अमानतदार) और 'सादिक़' (सच्चा) मानता था। आपने कभी शायरी या भाषणबाज़ी नहीं की थी। अचानक चालीस वर्ष की आयु में इतना अलौकिक, हिकमत और ज्ञान से परिपूर्ण कलाम प्रस्तुत करना इस बात का खुला सुबूत है कि यह अल्लाह की वह्य है, आपकी अपनी सोच नहीं।

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