कुरान - 10:17 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

17
فَمَنۡ أَظۡلَمُ مِمَّنِ ٱفۡتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا أَوۡ كَذَّبَ بِـَٔايَٰتِهِۦٓۚ إِنَّهُۥ لَا يُفۡلِحُ ٱلۡمُجۡرِمُونَ

Transliteration: (Faman azlamu mimmanif taraa 'alal laahi kaziban aw kazzaba bi Aayaatih; innahoo laa yuflihul mujrimoon)

फिर उस व्यक्ति से बढ़कर ज़ालिम कौन होगा जो अल्लाह पर झूठा आरोप लगाए या उसकी आयतों को झुठलाए? निस्संदेह, अपराधी कभी सफल नहीं हो सकते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 17 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 17 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अल्लाह पर झूठ गढ़ना और उसकी निशानियों को झुठलाना सबसे बड़ा पाप है

दो तरह के लोग सबसे बड़े ज़ालिम हैं: एक वे जो अल्लाह की तरफ़ ऐसी बातें जोड़ते हैं जो उसने नहीं कहीं (जैसे शिर्क करना या झूठी नुबुव्वत का दावा करना), और दूसरे वे जो अल्लाह की सच्ची वह्य और आयतों को नकारते हैं। ऐसे लोगों का अंत पूर्ण विफलता और बर्बादी है।

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