Transliteration: (Wa maa kaanan naasu illaaa ummatanw waahidatan fa khtalafoo; wa law laa kalimatun sabaqat mir Rabbika laqudiya bainahum fee maa feehi yakhtalifoon)
हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर सदियों तक सभी इंसान एक ही सत्य धर्म—तौहीद (एकेश्वरवाद)—पर क़ायम थे। बाद में स्वार्थ, अहंकार और शैतानी बहकावे के कारण लोगों ने नए-नए धर्म, सम्प्रदाय और बुतपरस्ती गढ़ ली।
अल्लाह ने हर इंसान और क़ौम के लिए एक निश्चित मुहलत (आयु) और हिसाब के लिए आख़िरत का दिन तय कर रखा है, अन्यथा दुनिया में ही तुरंत सत्य और असत्य का निर्णय करके नाफ़रमानों को नष्ट कर दिया जाता।
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