कुरान - 10:19 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

19
وَمَا كَانَ ٱلنَّاسُ إِلَّآ أُمَّةٗ وَٰحِدَةٗ فَٱخۡتَلَفُواْۚ وَلَوۡلَا كَلِمَةٞ سَبَقَتۡ مِن رَّبِّكَ لَقُضِيَ بَيۡنَهُمۡ فِيمَا فِيهِ يَخۡتَلِفُونَ

Transliteration: (Wa maa kaanan naasu illaaa ummatanw waahidatan fa khtalafoo; wa law laa kalimatun sabaqat mir Rabbika laqudiya bainahum fee maa feehi yakhtalifoon)

और सब इंसान (आरंभ में) एक ही समुदाय (उम्मत) थे, फिर उन्होंने आपसी मतभेद पैदा कर लिए। और यदि आपके रब की ओर से एक बात पहले से तय न हो चुकी होती, तो उनके बीच उस बात का फ़ैसला कर दिया जाता जिसमें वे मतभेद कर रहे हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 19 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 19 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] मानवता की मूल एकता (तौहीद)

हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर सदियों तक सभी इंसान एक ही सत्य धर्म—तौहीद (एकेश्वरवाद)—पर क़ायम थे। बाद में स्वार्थ, अहंकार और शैतानी बहकावे के कारण लोगों ने नए-नए धर्म, सम्प्रदाय और बुतपरस्ती गढ़ ली।

✅ [2] फ़ैसले के लिए तयशुदा समय (क़यामत)

अल्लाह ने हर इंसान और क़ौम के लिए एक निश्चित मुहलत (आयु) और हिसाब के लिए आख़िरत का दिन तय कर रखा है, अन्यथा दुनिया में ही तुरंत सत्य और असत्य का निर्णय करके नाफ़रमानों को नष्ट कर दिया जाता।

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