कुरान - 10:42 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
وَمِنۡهُم مَّن يَسۡتَمِعُونَ إِلَيۡكَۚ أَفَأَنتَ تُسۡمِعُ ٱلصُّمَّ وَلَوۡ كَانُواْ لَا يَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Wa minhum mai yastami'oona iliak; afa anta tusmi'us summa wa law kaanoo laa ya'qiloon)

और उनमें कुछ ऐसे लोग हैं जो आपकी बातें सुनते हैं; तो क्या आप बहरों को सुनाएंगे, चाहे वे कुछ भी न समझते हों? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 42 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] आध्यात्मिक बहरापन

वे कान होते हुए भी सत्य को समझने की नीयत से नहीं सुनते, केवल उपहास और नुक्ताचीनी के लिए सुनते हैं। क़ुरआन ने ऐसे लोगों को आत्मिक रूप से बहरा क़रार दिया है क्योंकि जब समझने की चाह ही न हो तो कोई समझाने वाला कुछ नहीं कर सकता।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now