कुरान - 10:44 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
إِنَّ ٱللَّهَ لَا يَظۡلِمُ ٱلنَّاسَ شَيۡـٔٗا وَلَٰكِنَّ ٱلنَّاسَ أَنفُسَهُمۡ يَظۡلِمُونَ

Transliteration: (Innal laaha laa yazlimun naasa shai'anw wa laakin nannaasa anfusahum yazlimoon)

निस्संदेह, अल्लाह लोगों पर ज़रा भी ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि लोग स्वयं अपने ही ऊपर ज़ुल्म करते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 44 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अल्लाह के न्याय की घोषणा

अल्लाह तआला ने सबको सोचने-समझने की बुद्धि, आँख, कान और हिदायत के लिए पैग़म्बर व किताबें दीं। जो व्यक्ति जानबूझकर गुनाह और कुफ़्र का मार्ग चुनता है, वह स्वयं अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारता है और अपनी आत्मा पर ज़ुल्म करता है।

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