कुरान - 10:46 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
وَإِمَّا نُرِيَنَّكَ بَعۡضَ ٱلَّذِي نَعِدُهُمۡ أَوۡ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِلَيۡنَا مَرۡجِعُهُمۡ ثُمَّ ٱللَّهُ شَهِيدٌ عَلَىٰ مَا يَفۡعَلُونَ

Transliteration: (Wa imma nuriyannaka ba'dal lazee na'iduhum aw natawaffayannaka fa ilainaa marji'uhum thummal laahu shaheedun 'alaa maa yaf'aloon)

और चाहे हम आपको (आपके जीवन में ही) उस (अज़ाब) का कुछ हिस्सा दिखा दें जिसका हमने उनसे वादा किया है, या हम आपको (उससे पहले ही) अपने पास उठा लें, अंततः उनकी वापसी हमारी ही ओर है; फिर जो कुछ वे कर रहे हैं, अल्लाह उस पर पूर्ण गवाह है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 46 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] नबी करीम ﷺ को तसल्ली और मुजरिमों को चेतावनी

रसूलुल्लाह ﷺ को आश्वस्त किया गया कि मुशरिकों पर अज़ाब का आना निश्चित है। चाहे वह आपकी हयात में बदर आदि के रूप में सामने आए या आपके परलोक गमन के बाद, वे किसी भी दशा में अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकते। अल्लाह उनके हर कुफ़्र और साज़िश का गवाह है और पूरा बदला देगा।

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