कुरान - 10:47 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
وَلِكُلِّ أُمَّةٖ رَّسُولٞۖ فَإِذَا جَآءَ رَسُولُهُمۡ قُضِيَ بَيۡنَهُم بِٱلۡقِسۡطِ وَهُمۡ لَا يُظۡلَمُونَ

Transliteration: (Wa likulli ummatir Rasoolun fa izaa jaaa'a Rasooluhum qudiya bainahum bilqisti wa hum laa yuzlamoon)

और प्रत्येक समुदाय (क़ौम) के लिए एक रसूल हुआ है; फिर जब उनका रसूल आ जाता है, तो उनके बीच न्याय के साथ फ़ैसला कर दिया जाता है और उन पर तनिक भी ज़ुल्म नहीं किया जाता। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 47 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] रसूलों के आगमन का ईश्वरीय नियम

अल्लाह तआला किसी क़ौम को चेतावनी और मार्गदर्शन भेजे बिना सज़ा नहीं देता। जब रसूल आकर सत्य को पूरी तरह स्पष्ट कर देता है और फिर भी लोग इन्कार पर अड़े रहते हैं, तो अल्लाह का न्यायसंगत फ़ैसला नाज़िल हो जाता है।

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