कुरान - 10:49 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
قُل لَّآ أَمۡلِكُ لِنَفۡسِي ضَرّٗا وَلَا نَفۡعًا إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُۗ لِكُلِّ أُمَّةٍ أَجَلٌۚ إِذَا جَآءَ أَجَلُهُمۡ فَلَا يَسۡتَـٔۡخِرُونَ سَاعَةٗ وَلَا يَسۡتَقۡدِمُونَ

Transliteration: (Qul laaa amliku linafsee darranw wa laa naf'an illaa maa shaaa'al laah; likulli ummatin ajalun izaa jaaa'a ajaluhum fa laaa yasta'khiroona saa'atanw wa laa yastaqdimoon)

कह दीजिए, "मैं तो अपनी जान के लिए भी किसी लाभ या हानि का अधिकार नहीं रखता, सिवाय इसके जो अल्लाह चाहे। प्रत्येक समुदाय के लिए एक निर्धारित समय (अजल) है; जब उनका समय आ जाता है, तो वे न एक घड़ी पीछे हट सकते हैं और न आगे बढ़ सकते हैं।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 49 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] बशरियत और तौहीद का स्पष्ट ऐलान

नबी करीम ﷺ ने स्पष्ट कर दिया कि लाभ-हानि और अज़ाब भेजने का सारा अधिकार केवल अल्लाह के हाथ में है, नबी का काम केवल संदेश पहुँचाना है। हर क़ौम के उत्थान और पतन का एक निश्चित समय निर्धारित है, जिसे न टाला जा सकता है और न समय से पहले लाया जा सकता है।

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