कुरान - 10:51 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
أَثُمَّ إِذَا مَا وَقَعَ ءَامَنتُم بِهِۦٓۚ ءَآلۡـَٰٔنَ وَقَدۡ كُنتُم بِهِۦ تَسۡتَعۡجِلُونَ

Transliteration: ('A thumma izaa maa waqa'a aamantum bih; aaal 'aana wa qad kuntum bihee tasta'jiloon)

क्या फिर जब वह (अज़ाब) आ ही पड़ेगा, तब तुम उस पर ईमान लाओगे? अब (ईमान लाते हो)? जबकि तुम ही इसके लिए जल्दी मचाया करते थे! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 51 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अज़ाब देखने के बाद ईमान का अमान्य होना

जब अज़ाब आँखों के सामने आ जाता है, तो उस समय का ईमान और तौबा अल्लाह के यहाँ क़ुबूल नहीं होती। ईमान की क़ीमत केवल ग़ैब में (बिना देखे) विश्वास करने में है।

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