कुरान - 10:45 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

45
وَيَوۡمَ يَحۡشُرُهُمۡ كَأَن لَّمۡ يَلۡبَثُوٓاْ إِلَّا سَاعَةٗ مِّنَ ٱلنَّهَارِ يَتَعَارَفُونَ بَيۡنَهُمۡۚ قَدۡ خَسِرَ ٱلَّذِينَ كَذَّبُواْ بِلِقَآءِ ٱللَّهِ وَمَا كَانُواْ مُهۡتَدِينَ

Transliteration: (Wa Yawma yahshuruhum ka 'an lam yalbasooo illaa saa'atan minan nahaari yata'aarafoona bainahum; qad khasiral lazeena kazzaboo bi liqaaa'il laahi wa maa kaanoo muhtadeen)

और जिस दिन वह उन्हें इकट्ठा करेगा, तो (उन्हें ऐसा लगेगा) मानो वे (दुनिया में) दिन की एक घड़ी (घंटे भर) के सिवा नहीं ठहरे थे; वे आपस में एक-दूसरे को पहचानेंगे। वास्तव में वे लोग घाटे में रहे जिन्होंने अल्लाह से मिलने को झुठलाया और वे सीधे मार्ग पर चलने वाले न थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 45 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 45 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] दुनिया की क्षणभंगुरता का अंतिम एहसास

क़यामत के दिन जब हश्र के मैदान में लोग खड़े होंगे, तो दुनिया की 60-70 साल की लंबी ज़िंदगी उन्हें दिन के एक छोटे से पहर (एक घड़ी) के बराबर महसूस होगी। उस समय उन्हें पछतावा होगा कि इस चंद मिनटों की दुनिया के लिए उन्होंने अपनी अनन्त आख़िरत को दांव पर लगा दिया।

✅ [2] आख़िरत के मुंकिरों का भारी नुक़सान

जिन्होंने परलोक और अल्लाह की मुलाक़ात का इन्कार किया था, वे उस दिन पूर्ण रूप से दिवालिया और घाटे में रहेंगे क्योंकि तौबा और अमल का समय हमेशा के लिए समाप्त हो चुका होगा।

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