कुरान - 10:7 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

7
إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يَرۡجُونَ لِقَآءَنَا وَرَضُواْ بِٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَا وَٱطۡمَأَنُّواْ بِهَا وَٱلَّذِينَ هُمۡ عَنۡ ءَايَٰتِنَا غَٰفِلُونَ

Transliteration: (Innal lazeena laa yarjoona liqaaa'anaa wa radoo bilhayaatid dunyaa watma' annoo bihaa wallazeena hum 'an Aayaatinaa ghaafiloon)

बेशक जो लोग हमसे मिलने की उम्मीद नहीं रखते और सांसारिक जीवन से ही प्रसन्न हो गए हैं और उसी पर मुतमईन (संतुष्ट) हो बैठे हैं, और जो हमारी निशानियों से ग़ाफ़िल (लापरवाह) हैं— (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 7 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 7 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] आख़िरत को भूलकर दुनिया में मगन होना

इस आयत में उन लोगों की मानसिकता का चित्रण है जो परलोक (आख़िरत) और अल्लाह के सामने पेशी का इन्कार करते हैं। वे इस अस्थाई दुनियावी ऐशो-आराम को ही अपना अंतिम लक्ष्य मान लेते हैं और अल्लाह की भेजी हुई निशानियों और चेतावनी की अनदेखी करते हैं।

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