Transliteration: (Huwal lazee ja'alash shamsa diyaaa'anw walqamara nooranw wa qaddarahoo manaazila li ta'lamoo 'adadas sineena walhisaab; maa khalaqal laahu zaalika illa bilhaqq; yufassilul aayaati li qawminy ya'lamoon)
क़ुरआन ने सूरज के लिए 'ज़िया' (अपनी स्वयं की तेज़ रोशनी) और चाँद के लिए 'नूर' (सौम्य, प्रतिबिंबित रोशनी) शब्द इस्तेमाल किया है। आधुनिक खगोल विज्ञान ने भी सिद्ध किया है कि सूरज स्वयं प्रकाश उत्सर्जित करता है जबकि चाँद सूरज की रोशनी को प्रतिबिंबित करता है।
चाँद के घटने-बढ़ने और उसकी तयशुदा 28 मंज़िलों के ज़रिए इंसान महीनों, सालों और इस्लामी तारीखों (हिजरी कैलेंडर) का सटीक हिसाब रखते हैं। पूरी कायनात एक सटीक गणितीय और प्राकृतिक नियम के तहत चल रही है जो बेमक़सद नहीं है।
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