Transliteration: (Inna Rabbakumul laahul lazee khalaqas samaawaati wal arda fee sittati aiyaamin thummas tawaa 'alal 'Arshi yudabbirul amra maa min shafee'in illaa min ba'di iznih; zalikumul laahu Rabbukum fa'budooh; afalaa tazakkaroon)
अल्लाह तआला ने पूरी कायनात को छह दिनों (चरणों/कालों) में पैदा किया। वह तो पलक झपकते ही 'कुन' (हो जा) कहकर सब कुछ बना सकता था, लेकिन उसने हमें क्रमिक विकास, व्यवस्था और धैर्य का सबक़ सिखाया। अर्श पर मुस्तवी होना उसकी शान के अनुकूल है, जैसा कि उसकी महानता का तकाज़ा है।
कायनात को पैदा करके अल्लाह ने इसे अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि हर कण, हर जीव और पूरे ब्रह्मांड के संचालन और प्रबंधन की बागडोर उसी के दस्त-ए-क़ुदरत में है।
मुशरिकीन का यह भ्रम था कि उनकी देवियां या मूर्तियां अल्लाह के दरबार में बिना किसी रोक-टोक के उनकी सिफ़ारिश कर देंगी। अल्लाह ने साफ़ फ़रमा दिया कि उसकी इजाज़त और मंज़ूरी के बिना कोई भी किसी की सिफ़ारिश नहीं कर सकता। अतः केवल उसी एक अल्लाह की बंदगी करो।
For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.
संबंधित आयात (विषय) / Related Ayat