कुरान - 10:3 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

3
إِنَّ رَبَّكُمُ ٱللَّهُ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ فِي سِتَّةِ أَيَّامٖ ثُمَّ ٱسۡتَوَىٰ عَلَى ٱلۡعَرۡشِۖ يُدَبِّرُ ٱلۡأَمۡرَۖ مَا مِن شَفِيعٍ إِلَّا مِنۢ بَعۡدِ إِذۡنِهِۦۚ ذَٰلِكُمُ ٱللَّهُ رَبُّكُمۡ فَٱعۡبُدُوهُۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ

Transliteration: (Inna Rabbakumul laahul lazee khalaqas samaawaati wal arda fee sittati aiyaamin thummas tawaa 'alal 'Arshi yudabbirul amra maa min shafee'in illaa min ba'di iznih; zalikumul laahu Rabbukum fa'budooh; afalaa tazakkaroon)

बेशक तुम्हारा रब अल्लाह ही है जिसने आसमानों और ज़मीन को छह दिनों (कालों) में पैदा किया, फिर अर्श पर मुस्तवी (विराजमान) हुआ; वही हर मामले का प्रबंधन (तदबीर) करता है। कोई सिफ़ारिश (शफ़ाअत) करने वाला नहीं मगर उसकी अनुमति के बाद। वही अल्लाह तुम्हारा रब है, अतः उसी की इबादत करो। तो क्या तुम नसीहत नहीं पकड़ते? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 3 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 3 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] छह दिनों में सृष्टि की रचना और अर्श पर इस्तिवा

अल्लाह तआला ने पूरी कायनात को छह दिनों (चरणों/कालों) में पैदा किया। वह तो पलक झपकते ही 'कुन' (हो जा) कहकर सब कुछ बना सकता था, लेकिन उसने हमें क्रमिक विकास, व्यवस्था और धैर्य का सबक़ सिखाया। अर्श पर मुस्तवी होना उसकी शान के अनुकूल है, जैसा कि उसकी महानता का तकाज़ा है।

✅ [2] ब्रह्मांड का प्रबंध और अकेला संप्रभु (मुदब्बिर-ए-उमूर)

कायनात को पैदा करके अल्लाह ने इसे अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि हर कण, हर जीव और पूरे ब्रह्मांड के संचालन और प्रबंधन की बागडोर उसी के दस्त-ए-क़ुदरत में है।

✅ [3] शफ़ाअत (सिफ़ारिश) का नियम

मुशरिकीन का यह भ्रम था कि उनकी देवियां या मूर्तियां अल्लाह के दरबार में बिना किसी रोक-टोक के उनकी सिफ़ारिश कर देंगी। अल्लाह ने साफ़ फ़रमा दिया कि उसकी इजाज़त और मंज़ूरी के बिना कोई भी किसी की सिफ़ारिश नहीं कर सकता। अतः केवल उसी एक अल्लाह की बंदगी करो।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now