Transliteration: (Ilaihi marji'ukum jamee 'anw wa'dal laahi haqqaa; innahoo yabda'ul khalqa thumma yu'eeduhoo liyajziyal lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati bilqist; wallazeena kafaroo lahum sharaabun min hamee minw wa 'azaabun 'aleemun bimaa kaanoo yakfuroon)
जो ज़ात किसी चीज़ को पहली बार बिना किसी पूर्व नमूने के शून्यता से वजूद में ला सकती है, उसके लिए उसी चीज़ को दोबारा ज़िंदा करना तो और भी आसान है। यह क़यामत और आख़िरत की सत्यता का ठोस बौद्धिक प्रमाण है।
अगर दुनिया के बाद कोई आख़िरत न होती, तो नेक और बदकार, ज़ालिम और मज़लूम बराबर हो जाते। अल्लाह का न्याय यह तकाज़ा करता है कि ईमान वालों को उनकी नेकियों का भरपूर सिला मिले और नाफ़रमानों को उनके कुफ़्र और बुराइयों की सज़ा मिले।
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