कुरान - 10:4 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
إِلَيۡهِ مَرۡجِعُكُمۡ جَمِيعٗاۖ وَعۡدَ ٱللَّهِ حَقًّاۚ إِنَّهُۥ يَبۡدَؤُاْ ٱلۡخَلۡقَ ثُمَّ يُعِيدُهُۥ لِيَجۡزِيَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ بِٱلۡقِسۡطِۚ وَٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَهُمۡ شَرَابٞ مِّنۡ حَمِيمٖ وَعَذَابٌ أَلِيمُۢ بِمَا كَانُواْ يَكۡفُرُونَ

Transliteration: (Ilaihi marji'ukum jamee 'anw wa'dal laahi haqqaa; innahoo yabda'ul khalqa thumma yu'eeduhoo liyajziyal lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati bilqist; wallazeena kafaroo lahum sharaabun min hamee minw wa 'azaabun 'aleemun bimaa kaanoo yakfuroon)

उसी की ओर तुम सब की वापसी है। यह अल्लाह का सच्चा वादा है। बेशक वही पैदाइश की शुरुआत करता है और फिर उसे दोबारा लौटाएगा (जीवित करेगा), ताकि उन लोगों को न्याय के साथ बदला दे जिन्होंने ईमान लाया और नेक अमल किए। और जिन लोगों ने कुफ़्र (इन्कार) किया, उनके लिए खौलता हुआ पानी पीने को और दर्दनाक अज़ाब होगा, क्योंकि वे कुफ़्र करते थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 4 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] दोबारा ज़िंदा किया जाना (हश्र और बा'स)

जो ज़ात किसी चीज़ को पहली बार बिना किसी पूर्व नमूने के शून्यता से वजूद में ला सकती है, उसके लिए उसी चीज़ को दोबारा ज़िंदा करना तो और भी आसान है। यह क़यामत और आख़िरत की सत्यता का ठोस बौद्धिक प्रमाण है।

✅ [2] न्याय और प्रतिदान (अदल व जज़ा)

अगर दुनिया के बाद कोई आख़िरत न होती, तो नेक और बदकार, ज़ालिम और मज़लूम बराबर हो जाते। अल्लाह का न्याय यह तकाज़ा करता है कि ईमान वालों को उनकी नेकियों का भरपूर सिला मिले और नाफ़रमानों को उनके कुफ़्र और बुराइयों की सज़ा मिले।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now