Transliteration: ('A kaana linnaasi 'ajaaban 'an 'awhainaaa 'ilaa rajulin minhum 'an anzirin naasa wa bashshiril lazeena 'aamanoo 'anna lahum qadama sidqin 'inda Rabbihim; qaalal kaafiroona 'inna haazaa la saahirun mubeen)
मक्का के मुशरिकीन इस बात पर हैरत जताते थे कि अल्लाह ने किसी फ़रिश्ते को क्यों नहीं भेजा, बल्कि उन्हीं के बीच रहने वाले एक इंसान हज़रत मुहम्मद ﷺ को नबी बनाकर क्यों चुना। अल्लाह तआला ने स्पष्ट किया कि इंसानों की हिदायत और मार्गदर्शन के लिए एक इंसान ही सबसे उत्तम आदर्श और नबी हो सकता है, जो उनके सुख-दुख और मानवीय भावनाओं को समझ सके।
ईमान लाने वालों के लिए उनके रब के पास "क़दम-ए-सिद्क़" यानी सच्चा सम्मान, नेक आमाल का उत्तम बदला और हज़रत रसूलुल्लाह ﷺ की शफ़ाअत (सिफ़ारिश) और जन्नत का वादा है।
जब मुंकिर क़ुरआन के बेमिसाल प्रभाव, हिकमत और पैग़म्बर ﷺ के चरित्र का मुक़ाबला करने से असमर्थ हो गए, तो उन्होंने हक़ से मुंह मोड़ने के लिए इसे "जादू" और आप ﷺ को "जादूगर" कहना शुरू कर दिया।
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