कुरान - 10:2 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

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أَكَانَ لِلنَّاسِ عَجَبًا أَنۡ أَوۡحَيۡنَآ إِلَىٰ رَجُلٖ مِّنۡهُمۡ أَنۡ أَنذِرِ ٱلنَّاسَ وَبَشِّرِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓاْ أَنَّ لَهُمۡ قَدَمَ صِدۡقٍ عِندَ رَبِّهِمۡۗ قَالَ ٱلۡكَٰفِرُونَ إِنَّ هَٰذَا لَسَٰحِرٞ مُّبِينٌ

Transliteration: ('A kaana linnaasi 'ajaaban 'an 'awhainaaa 'ilaa rajulin minhum 'an anzirin naasa wa bashshiril lazeena 'aamanoo 'anna lahum qadama sidqin 'inda Rabbihim; qaalal kaafiroona 'inna haazaa la saahirun mubeen)

क्या लोगों के लिए यह कोई आश्चर्य की बात है कि हमने उन्हीं में से एक व्यक्ति (रसूल) पर वह्य (प्रकाशना) भेजी कि वे लोगों को (अल्लाह की पकड़ से) सावधान करें और ईमान लाने वालों को यह ख़ुशख़बरी दें कि उनके लिए उनके रब के पास सच्चा मर्तबा और उच्च स्थान है? मुंकिरों (काफ़िरों) ने कहा, "निस्संदेह, यह तो एक खुला जादूगर है!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 2 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 2 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] इंसान में से रसूल चुने जाने पर आपत्ति का निवारण

मक्का के मुशरिकीन इस बात पर हैरत जताते थे कि अल्लाह ने किसी फ़रिश्ते को क्यों नहीं भेजा, बल्कि उन्हीं के बीच रहने वाले एक इंसान हज़रत मुहम्मद ﷺ को नबी बनाकर क्यों चुना। अल्लाह तआला ने स्पष्ट किया कि इंसानों की हिदायत और मार्गदर्शन के लिए एक इंसान ही सबसे उत्तम आदर्श और नबी हो सकता है, जो उनके सुख-दुख और मानवीय भावनाओं को समझ सके।

✅ [2] “क़दम-ए-सिद्क़” (सच्चा मर्तबा / उच्च स्थान)

ईमान लाने वालों के लिए उनके रब के पास "क़दम-ए-सिद्क़" यानी सच्चा सम्मान, नेक आमाल का उत्तम बदला और हज़रत रसूलुल्लाह ﷺ की शफ़ाअत (सिफ़ारिश) और जन्नत का वादा है।

✅ [3] जादूगरी का बेबुनियाद आरोप

जब मुंकिर क़ुरआन के बेमिसाल प्रभाव, हिकमत और पैग़म्बर ﷺ के चरित्र का मुक़ाबला करने से असमर्थ हो गए, तो उन्होंने हक़ से मुंह मोड़ने के लिए इसे "जादू" और आप ﷺ को "जादूगर" कहना शुरू कर दिया।

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