कुरान - 10:74 सूरह यूनुस अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
ثُمَّ بَعَثۡنَا مِنۢ بَعۡدِهِۦ رُسُلًا إِلَىٰ قَوۡمِهِمۡ فَجَآءُوهُم بِٱلۡبَيِّنَٰتِ فَمَا كَانُواْ لِيُؤۡمِنُواْ بِمَا كَذَّبُواْ بِهِۦ مِن قَبۡلُۚ كَذَٰلِكَ نَطۡبَعُ عَلَىٰ قُلُوبِ ٱلۡمُعۡتَدِينَ

Transliteration: (Thumma ba'asnaa min ba'dihee Rusulan ilaa qawmihim fajaaa'oohum bil baiyinaati famaa kaanoo liyu'minoo bimaa kazzaboo bihee min qabl; kazaalika natba'u 'alaa quloobil mu'tadeen)

फिर उनके बाद हमने और भी कई रसूलों को उनकी क़ौमों की ओर भेजा, वे उनके पास स्पष्ट प्रमाण लेकर आए, लेकिन वे ऐसे न थे कि उस चीज़ पर ईमान लाते जिसे वे पहले ही झुठला चुके थे। इसी तरह हम हद से गुज़रने वालों के दिलों पर मुहर लगा देते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूनुस आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूनुस – आयत 74 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] रसूलों का सिलसिला और हठधर्मिता का नतीजा

नूह (अलैहिस्सलाम) के बाद हूद, सालेह, लूत और शुऐब (अलैहिमुस्सलाम) आदि पैग़म्बर भेजे गए। लेकिन उन क़ौमों की मानसिकता ऐसी बिगड़ चुकी थी कि पहले ही दिन से इन्कार की जो ज़िद ठान ली थी, उस पर अड़े रहे। जब इंसान हठधर्मिता में हद पार कर लेता है, तो उसकी सोचने-समझने की क्षमता पर मुहर लग जाती है।

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