मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 20 तफ़सीर
मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)
सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 20
"और ज़मीन में यक़ीन रखने वालों के लिए बहुत सी निशानियाँ हैं [19]!"
[19] ज़मीन में बसीरत की निशानियाँ
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:
रब की क़ुदरत का मुताला: यक़ीन रखने वाले मोमिनों के लिए पूरी ज़मीन अल्लाह की मारिफ़त की खुली किताब है, जिसमें वे रब की क़ुदरत का मुशाहदा करते हैं।
हश्र की दलील: सूखी और बंजर ज़मीन का बारिश के बाद दोबारा हरा-भरा हो जाना इस बात की खुली निशानी है कि मरने के बाद इंसानों को भी इसी तरह दोबारा ज़िंदा किया जाएगा।
सब्र व आजिज़ी का सबक़: ज़मीन की सादगी और उसकी पैदावार इंसान को आजिज़ी और अल्लाह के फ़ैसलों पर सब्र करने का सबक़ देती है।
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