कुरान - 51:21 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
وَفِيٓ أَنفُسِكُمۡۚ أَفَلَا تُبۡصِرُونَ

Transliteration: (Wa feee anfusikum; afalaa tubsiroon)

और ख़ुद तुम्हारी अपनी जानों में भी (निशानियाँ हैं), तो क्या तुम देखते नहीं [20]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 21

"और ख़ुद तुम्हारी अपनी जानों में भी (निशानियाँ हैं), तो क्या तुम देखते नहीं [20]?"


[20] इंसानी वजूद में मारिफ़त-ए-इलाही की निशानियाँ

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इंसान का अपना वजूद रब की क़ुदरत का अज़ीम आईना है:

  • तख़लीक़ का कमाल: तुम्हारी पैदाइश, आदा व जवारेह (अंगों) की ख़ूबसूरत तरतीब, रगों और नसों का निज़ाम, और ज़िंदगी में हालात का बदलना इस बात का खुला सुबूत है कि तुम किसी हकीम व क़ादिर रब के क़ब्ज़े में हो।
  • आलम-ए-असग़र (छोटा जहान): सूफ़िया-ए-किराम फ़रमाते हैं कि कायनात में जो कुछ भी है—आसमान, ज़मीन, पहाड़, समंदर, नेकी और बदी के असरात—उन सब का नमूना इंसान के अंदर मौजूद है।
  • ख़ुद-शनासी से ख़ुदा-शनासी: हदीस शरीफ़ में आता है: "मन अरफ़ा नफ़्सहू फ़क़द अरफ़ा रब्बहू" (जिसने अपने नफ़्स को पहचान लिया, उसने अपने रब को पहचान लिया)। इंसान अगर अपने वजूद पर ग़ौर करे, तो उसे रब की मारिफ़त हासिल हो जाएगी।

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