कुरान - 51:23 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

23
فَوَرَبِّ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ إِنَّهُۥ لَحَقّٞ مِّثۡلَ مَآ أَنَّكُمۡ تَنطِقُونَ

Transliteration: (Fawa Rabbis samaaa'i wal ardi innahoo lahaqqum misla maa annakum tantiqoon)

पस क़सम है आसमान और ज़मीन के रब की! बेशक यह (क़ुरआन) यक़ीनन हक़ है [23], उसी तरह जैसे तुम आपस में बात करते हो [24]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 23 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 23

"पस क़सम है आसमान और ज़मीन के रब की! बेशक यह (क़ुरआन) यक़ीनन हक़ है [23], उसी तरह जैसे तुम आपस में बात करते हो [24]!"


[23] क़ुरआने करीम की हक़्क़ानियत पर क़सम

अल्लाह तआला ने अपनी ज़ात-ए-अक़दस की क़सम खाकर क़ुरआने मजीद और हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की रिसालत की हक़्क़ानियत को साबित फ़रमाया कि इसमें किसी शक व शुब्हे की कोई गुंजाइश नहीं है।


[24] क़ुरआन की अरबी ज़बान और उसका मक़ाम

  • यह क़ुरआन तुम्हारी अपनी अरबी ज़बान (लफ़्ज़े क़ुरैश) में नाज़िल हुआ है, ताकि तुम इसे अच्छी तरह समझ सको।
  • हज़रत मुफ़्ती साहब फ़रमाते हैं कि क़ुरआन की असली इबारत वही अरबी कलाम है जो नाज़िल हुआ; किसी दूसरी ज़बान के तर्जमे पर हक़ीक़ी क़ुरआन के अहकाम (जैसे नमाज़ में पढ़ना) आइद नहीं होते, असली मक़ाम अरबी मतन ही का है।

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