कुरान - 51:22 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
وَفِي ٱلسَّمَآءِ رِزۡقُكُمۡ وَمَا تُوعَدُونَ

Transliteration: (Wa fissamaaa'i rizqukum wa maa too'adoon)

और आसमान में तुम्हारी रोज़ी है [21] और वह सब कुछ जिसका तुमसे वादा किया जाता है [22]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 22

"और आसमान में तुम्हारी रोज़ी है [21] और वह सब कुछ जिसका तुमसे वादा किया जाता है [22]!"


[21] आसमान से ज़ाहिरी व बातिनी रिज़्क़

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • ज़ाहिरी रोज़ी: बारिश, धूप, हवा और कायनात के अस्बाब आसमान से ही उतरते हैं जिनके ज़रिए ज़मीन से इंसान का रिज़्क़ पैदा होता है। या इससे मुराद यह है कि तमाम रिज़्क़ के अस्ली ख़ज़ाने आसमान में महफ़ूज़ हैं।
  • रूहानी रोज़ी: जिस तरह जिस्मानी ग़िज़ा आसमान से बारिश की सूरत में आती है, उसी तरह रूहानी ग़िज़ा यानी 'वह्य-ए-इलाही' और क़ुरआने करीम भी आसमान से ही नाज़िल हुआ है।

[22] जन्नत और लौहे महफ़ूज़ का वादा

  • जिस जन्नत और नेअमतों का ईमान वालों से वादा किया गया है, वह भी आसमानों में है।
  • तमाम तक़दीरें और क़यामत के अहकाम लौहे महफ़ूज़ में दर्ज हैं, जो आसमान में है।

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