कुरान - 51:26 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
فَرَاغَ إِلَىٰٓ أَهۡلِهِۦ فَجَآءَ بِعِجۡلٖ سَمِينٖ

Transliteration: (Faraagha ilaaa ahlihee fajaaa'a bi'ijlin sameen)

फिर वे चुपके से अपने घर गए और एक मोटा-ताज़ा भुना हुआ बछड़ा ले आए [28]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 26

"फिर वे चुपके से अपने घर गए और एक मोटा-ताज़ा भुना हुआ बछड़ा ले आए [28]!"


[28] मेहमान-नवाज़ी की अज़ीम सुन्नत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) बेहद सख़ी और मेहमान-नवाज़ थे; वे बिला-ताख़ीर अपने अहल-ओ-अयाल के पास गए और मेहमानों की ख़ातिर एक मोटा-ताज़ा बछड़ा ज़िबह कर के भुनवा कर पेश किया।
  • यह वाक़िआ सिखाता है कि मेहमान की इज़्ज़त करना और उसके आगे बेहतरीन खाना पेश करना अंबिया की शान और सुन्नत है, चाहे मेहमान अजनबी ही क्यों न हो।

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