कुरान - 51:29 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
فَأَقۡبَلَتِ ٱمۡرَأَتُهُۥ فِي صَرَّةٖ فَصَكَّتۡ وَجۡهَهَا وَقَالَتۡ عَجُوزٌ عَقِيمٞ

Transliteration: (Fa aqbalatim ra-atuhoo fee sarratin fasakkat wajhahaa wa qaalat 'ajoozun 'aqeem)

इस पर उनकी बीवी चिल्लाती हुई आगे बढ़ीं और उन्होंने अपना माथा पीट लिया और बोलीं: "क्या एक बाँझ बुढ़िया (के बच्चा होगा)?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 29

"इस पर उनकी बीवी चिल्लाती हुई आगे बढ़ीं और उन्होंने अपना माथा पीट लिया और बोलीं: 'क्या एक बाँझ बुढ़िया (के बच्चा होगा)?'"


हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हज़रत सारा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने जब यह बशारत सुनी तो शदीद ताज्जुब और हैरत से माथे पर हाथ मारा कि एक तो उम्र 90 या 99 साल की बुढ़ापे की, और ऊपर से हमेशा से बाँझ! यह ताज्जुब अल्लाह की क़ुदरत के मुअजिज़े पर हैरत का इज़हार था।

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