कुरान - 51:31 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
۞قَالَ فَمَا خَطۡبُكُمۡ أَيُّهَا ٱلۡمُرۡسَلُونَ

Transliteration: (Qaala famaa khatbukum ayyuhal mursaloon)

इब्राहीम ने फ़रमाया: "ऐ भेजे हुए फ़रिश्तो! अब तुम्हारा क्या मुआमला (अहम मक़सद) है [32]?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 31

"इब्राहीम ने फ़रमाया: 'ऐ भेजे हुए फ़रिश्तो! अब तुम्हारा क्या मुआमला (अहम मक़सद) है [32]?'"


[32] फ़रिश्तों के आने का दूसरा मक़सद

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) अपनी फ़रासत और नबवी बसीरत से समझ गए कि इतने जलीलुल क़द्र फ़रिश्तों का एक साथ आना सिर्फ़ ख़ुशख़बरी के लिए नहीं है, बल्कि कोई बड़ा मुआमला और अज़ाब का फ़ैसला नाफ़िज़ होने वाला है।

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