Transliteration: (Qaaloo kazaaliki qaala Rabbuki innahoo huwal hakeemul 'aleem (End Juz 26))
"फ़रिश्तों ने कहा: 'यूँ ही फ़रमाया है [31] तुम्हारे रब ने! बेशक वही बड़ी हिकमत वाला, सब कुछ जानने वाला है!'"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि फ़रिश्तों ने अर्ज़ किया कि यह किसी इंसान का क़ौल नहीं बल्कि क़ादिर-ए-मुतलक़ अल्लाह का फ़रमान है, जो हिकमत वाला और सब कुछ जानने वाला है; जब वह किसी चीज़ का इरादा फ़रमाता है तो कोई ज़ाहिरी रुकावट उसके हुक्म को नहीं रोक सकती।
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