कुरान - 51:30 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
قَالُواْ كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡحَكِيمُ ٱلۡعَلِيمُ

Transliteration: (Qaaloo kazaaliki qaala Rabbuki innahoo huwal hakeemul 'aleem (End Juz 26))

फ़रिश्तों ने कहा: "यूँ ही फ़रमाया है [31] तुम्हारे रब ने! बेशक वही बड़ी हिकमत वाला, सब कुछ जानने वाला है!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 30

"फ़रिश्तों ने कहा: 'यूँ ही फ़रमाया है [31] तुम्हारे रब ने! बेशक वही बड़ी हिकमत वाला, सब कुछ जानने वाला है!'"


[31] रब की हिकमत और इल्म-ए-मुहीत

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि फ़रिश्तों ने अर्ज़ किया कि यह किसी इंसान का क़ौल नहीं बल्कि क़ादिर-ए-मुतलक़ अल्लाह का फ़रमान है, जो हिकमत वाला और सब कुछ जानने वाला है; जब वह किसी चीज़ का इरादा फ़रमाता है तो कोई ज़ाहिरी रुकावट उसके हुक्म को नहीं रोक सकती।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now