Transliteration: (Qaalooo innaaa ursilnaaa ilaa qawmim mujrimeen)
"वे बोले: 'बेशक हम एक मुजरिम और बदकार क़ौम [33] की तरफ़ भेजे गए हैं,'"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि इससे मुराद हज़रत लूत (अलैहिस्सलाम) की बदकार क़ौम है जो बे-हयाई (अग़लाम-बाज़ी / हमजिंस-परस्ती) के ऐसे घिनौने गुनाह में मुब्तला थी जो उनसे पहले दुनिया में किसी ने नहीं किया था, और उनकी सरकशी हद से बढ़ चुकी थी।
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