कुरान - 51:33 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
لِنُرۡسِلَ عَلَيۡهِمۡ حِجَارَةٗ مِّن طِينٖ

Transliteration: (Linursila 'alaihim hijaa ratam min teen)

ताकि हम उन पर पकी हुई मिट्टी के पत्थर [34] बरसाएँ, (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 33

"ताकि हम उन पर पकी हुई मिट्टी के पत्थर [34] बरसाएँ,"


[34] कंकरियों और पत्थरों का अज़ाब

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'हिजारातन् मिन तीन' से मुराद दोज़ख़ की आग में पकी हुई सख़्त मिट्टी के पत्थर (कंकड़) थे, जिन्हें अल्लाह के हुक्म से उस मुजरिम क़ौम को नेस्त-ओ-नाबूद करने के लिए तय्यार किया गया था।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now