कुरान - 51:35 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
فَأَخۡرَجۡنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Fa akhrajnaa man kaana feehaa minal mu'mineen)

फिर हमने वहाँ से उन लोगों को निकाल लिया जो ईमान वाले थे [36] [37]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 35

"फिर हमने वहाँ से उन लोगों को निकाल लिया जो ईमान वाले थे [36] [37]।"


[36] अज़ाब से पहले मोमिनों की हिफ़ाज़त व निजात

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि अल्लाह तआला का यह दायमी क़ानून है कि जब किसी बस्ती पर हलाकत का अज़ाब आता है, तो उससे पहले अल्लाह अपने नबी और सच्चे ईमान वालों को ब-हिफ़ाज़त वहाँ से निकाल लेता है।


[37] नेक बंदों की मौजूदगी अज़ाब में रुकावट

  • जब तक किसी मक़ाम पर सच्चे मोमिन मौजूद रहते हैं, अल्लाह का आम अज़ाब वहाँ नाज़िल नहीं होता।
  • जब मोमिनों को निकाल लिया गया, तो मुजरिमों पर अज़ाब का टूटना यक़ीनी हो गया।

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