कुरान - 51:37 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
وَتَرَكۡنَا فِيهَآ ءَايَةٗ لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ ٱلۡعَذَابَ ٱلۡأَلِيمَ

Transliteration: (Wa taraknaa feehaaa aayatal lillazeena yakhaafoonal 'azaabal aleem)

और हमने वहाँ उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी [39] जो दर्दनाक अज़ाब से डरते हैं [40]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 37

"और हमने वहाँ उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी [39] जो दर्दनाक अज़ाब से डरते हैं [40]।"


[39] तबाहशुदा बस्ती बतौर इबरत

अल्लाह तआला ने सदूम और क़ौम-ए-लूत की उलटाई हुई बस्ती (बहरा-ए-मुर्दार / Dead Sea) को आइंदा नस्लों के लिए इबरत की खुली निशानी बना दिया, ताकि लोग नाफ़रमानी के अंजाम को देखकर सबक़ लें।


[40] ख़ौफ़े ख़ुदा रखने वालों के लिए नसीहत

इस निशानी से वही लोग फ़ायदा और सबक़ हासिल करते हैं जिनके दिलों में अल्लाह के अज़ाब का ख़ौफ़ और आख़िरत की फ़िक्र होती है।

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