कुरान - 51:38 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
وَفِي مُوسَىٰٓ إِذۡ أَرۡسَلۡنَٰهُ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ بِسُلۡطَٰنٖ مُّبِينٖ

Transliteration: (Wa fee Moosaaa iz arsalnaahu ilaa Fir'awna bisultaa nim mubeen)

और मूसा के वाक़िए में भी (निशानी है) [41], जब हमने उन्हें फ़िरऔन की तरफ़ खुली सनद (दलील व मुअजिज़ात) के साथ भेजा [42]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 38

"और मूसा के वाक़िए में भी (निशानी है) [41], जब हमने उन्हें फ़िरऔन की तरफ़ खुली सनद (दलील व मुअजिज़ात) के साथ भेजा [42]!"


[41] हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) का वाक़िआ

हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और फ़िरऔन के क़िस्से में अज़ीम इबरत है कि अंबिया का मुक़ाबला करने वाली बड़ी-बड़ी सल्तनतें किस तरह ज़िल्लत के साथ बर्बाद हुईं।


[42] सुल्ताने मुबीन (रौशन मुअजिज़ात)

  • 'सुल्ताने मुबीन' से मुराद असा (लाठी) का अज़दहा बनना और यदे बैज़ा (चमकता हाथ) जैसे रौशन मुअजिज़ात थे जिन्हें झुठलाना किसी के बस में न था।
  • हज़रत मूसा सिर्फ़ बनी इस्राईल ही के लिए नहीं बल्कि फ़िरऔन और अहले मिस्र तमाम लोगों की हिदायत के लिए रसूल बनाकर भेजे गए थे और उन सब पर आपकी इताअत फ़र्ज़ थी।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now