कुरान - 51:40 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
فَأَخَذۡنَٰهُ وَجُنُودَهُۥ فَنَبَذۡنَٰهُمۡ فِي ٱلۡيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٞ

Transliteration: (Fa akhaznaahu wa junoo dahoo fanabaznaahum fil yammi wa huwa muleem)

तो हमने उसे और उसके लश्करों को पकड़ लिया और उन्हें समंदर में फेंक दिया, इस हाल में कि वह अपने आपको मलामत कर रहा था [45]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 40

"तो हमने उसे और उसके लश्करों को पकड़ लिया और उन्हें समंदर में फेंक दिया, इस हाल में कि वह अपने आपको मलामत कर रहा था [45]!"


[45] ग़र्क़ाबी और फ़िरऔन की ना-मक़बूल तौबा

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं:

  • अल्लाह तआला ने फ़िरऔन और उसकी अज़ीम फ़ौज को कुलज़ुम के समंदर में ग़र्क़ कर के हलाक कर दिया।
  • डूबते वक़्त जब अज़ाब सामने आ गया तो फ़िरऔन पछताने लगा और ख़ुद को मलामत करते हुए ईमान का इज़हार किया, लेकिन मौत और अज़ाब को देखकर की गई तौबा अल्लाह की बारगाह में क़बूल नहीं होती।

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