कुरान - 51:41 सूरह अज़-ज़रियात अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
وَفِي عَادٍ إِذۡ أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمُ ٱلرِّيحَ ٱلۡعَقِيمَ

Transliteration: (Wa fee 'Aadin iz arsalnaa 'alaihimur reehal'aqeem)

और आद (की क़ौम) में भी (निशानी है), जब हमने उन पर बाँझ (तबाही मचाने वाली) हवा [46] भेजी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अज़-ज़रियात आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अज़-ज़ारियात तफ़सीर - आयत 41

"और आद (की क़ौम) में भी (निशानी है), जब हमने उन पर बाँझ (तबाही मचाने वाली) हवा [46] भेजी।"


[46] 'रीहे अक़ीम' (तबाही लाने वाली आंधी)

हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'रीहे अक़ीम' उस ख़ौफ़नाक और सूखी आंधी को कहा जाता है जो न तो बारिश लाती है और न दरख़्तों में फल लगने देती है, बल्कि वह सिर्फ़ तबाही व हलाकत बरसाती है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now