Transliteration: (Wa fee 'Aadin iz arsalnaa 'alaihimur reehal'aqeem)
"और आद (की क़ौम) में भी (निशानी है), जब हमने उन पर बाँझ (तबाही मचाने वाली) हवा [46] भेजी।"
हज़रत मुफ़्ती अहमद यार ख़ान नईमी रहमतुल्लाह अलैह फ़रमाते हैं कि 'रीहे अक़ीम' उस ख़ौफ़नाक और सूखी आंधी को कहा जाता है जो न तो बारिश लाती है और न दरख़्तों में फल लगने देती है, बल्कि वह सिर्फ़ तबाही व हलाकत बरसाती है।
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